ഗവൺമെന്റ് എച്ച്. എസ്. എസ്. ആനാവൂർ/അക്ഷരവൃക്ഷം/माँ की विनती

माँ की विनती

क्या... कहाँ .....?
क्या है इस ज़िन्दगी में ?

इस बाज़ार की
प्रचलित भीड़ कहाँ है ?
रास्ते में चलती रफ्तार गाडियाँ कहाँ है ?
सामानों फैलते द क
ानें कहाँ है ?
सब बंदी हो गई
सबको क्या हुआ ?
छोटे संदेह से चला ।

कर्मनिरत पुलीस गाड़ी ,
गर्जित आं बुलनस गाड़ी,
प्रतीक्षा की एक गोल बर्तन
डॉक्टर,पालतू सेना
सभी तैयार है ।
सर्वत्र मूकता ही मूकता है ।

माँ , क्या है यहाँ ?
बे़टा, तू मत खेलना ,
स्कूल मत जाना ,
बाहर भी मत जाना।
अपने शहर का द र्भा
ग्य आया है ।
जाग्रत ही जाग्रत रहें ।

मेरे प्यारों ,देखो
रेडियो में लड़की ने कहा ,
हाथों सदा साबुन से धोना,
शरीर सदा शुद्ध करना,
घर परिस्थिति साफ़ रखना,
नाक-मुंह पर घूँघट से लपेटना,
हम सुरक्षित ही रहूँ ।

मेरी अनमोल निधि,
कुछ दिन माँ के साथ
खेलने रहो,
हम एक साथ स
घर साफं करत
इस व्याधी को विराध करें ।
आओ ,वेटा भय न हो ।

अपने खेत पर देखो,
सब्जियाँ पकी हुई है ।
वह खेत ,और खेलत
घर के अंदर ही रहो ।
अपना जीवन रक्षा के लिए ।
अपने स्वास्थ्य के लिए ।
अपने प्रतिरोध के लिए ।

अपने गाँववालों के द ख
बेटा खाने , पीने .. कुछ नहीं।
तू अपने प्यास तरह,
द स
रों के प्यास भी बुझाओ
अपने खेत से सब्जी
सबको देने को एक मार्ग सोचो
ईश ,हमको अच्छा मिलें ।

हे ईश ,
देखे हमारी हालत,
क्या है यह ?
इसके ज़िम्मेदार कौन हैं ?
भविष्य क्या है ?
आँ खें खोलो देव
बेकसूर हम आपकी
प्रतीक्षा से .......।

അപ്സര എ.എസ്
+2 സയൻസ് ഗവ.എച്ച്.എസ്.എസ്.ആനാവൂർ
പാറശ്ശാല ഉപജില്ല
തിരുവനന്തപുരം
അക്ഷരവൃക്ഷം പദ്ധതി, 2020
കവിത