एक ऐसी शख्स ने
अपनी माया से
बनवायी एक गेंद। देखे तो अछि है।
लेकिन.... क्यू...?
यहाँ जो रहते है
वो कुछ भूला।
क्या...उसे नहीं पता।
याद आते आते
समछ में आयी
मैंने जीना भूल गया।
याद दिलाते गयी
वो गेंद....।
कुछ सिखाकर
जान क्या है । ज़िन्दगी क्या है।
उम्मीद क्या है । आशा काया है।
साथ हे तो जीना आसान।
स्वस्थ हे तो ज़िन्दगी आसान।