कभी सोचा न था कि
तुम ऐसा करोगे।
अब यकीन न हो रहा है कि
तू ने ऐसा किया।
यही बार-बार सोचती हूँ कि
ये क्यों हुआ है।
चाहत के सफर में
ढूँढ रही हूँ तुम्हें,
कहाँ है विश़्वस?
खडी हूँ ऎक बूँद विश़्वास के
तलाश में
तकदीर की चाहत और
मेरी विश़्वास के बीच का जंग
बस अब खत्म होनेवाली है।